[ LATEST 50+] Shayari on Life | जीवन पर शायरी हिंदी में 2022 ❤

 

Shayari on Life

😀😃🎊😉🙃 

 यहाँ सब कुछ बिकता है दोस्तों 

 रहना जरा संभाल के, 

 बेचने वाले हवा भी बेच देते है 

 गुब्बारों में डाल के। 

 😀😃🎊😉🙃


😀😃🎊😉🙃 

 है अजीब शहर की ज़िंदगी 

 न सफर रहा न क़याम है 

 कहीं कारोबार सी दोपहर 

 कहीं बदमिजाज़ सी शाम है। 

 😀😃🎊😉🙃


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 ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है, 

 ज़ुल्फ़-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है, 

 भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में, 

 इश्क ही इक हकीकत नहीं कुछ और भी है। 

 😀😃🎊😉🙃


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 थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ, 

 ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ, 

 कुछ उम्मीदें, 

 कुछ सपने, 

 कुछ महकती यादें, 

 जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ। 

 😀😃🎊😉🙃


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 न कर शुमार कि हर शय गिनी नहीं जाती, 

 ये ज़िंदगी है हिसाबों से जी नहीं जाती। 

 😀😃🎊😉🙃


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 धूप में निकलो घटाओं में नहाकर देखो, 

 ज़िंदगी क्या है किताबों को हटाकर देखो। 

 😀😃🎊😉🙃


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 ज्यादा ख़्वाहिशें नहीं ऐ ज़िंदगी तुझसे, 

 बस अगला कदम पिछले से बेहतरीन हो। 

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 हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो, 

 ये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो। 

 😀😃🎊😉🙃


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 पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं, 

 तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं। 

 😀😃🎊😉🙃


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 कभी खोले तो कभी ज़ुल्फ़ को बिखराए है, 

 ज़िंदगी शाम है और शाम ढली जाए है। 

 😀😃🎊😉🙃


😀😃🎊😉🙃 

 ऐ ज़िंदगी, 

 तोड़ कर हमको ऐसे बिखेरो इस बार, 

 न फिर से टूट पायें हम, 

 और न फिर से जुड़ पाए तू। 

 😀😃🎊😉🙃


😀😃🎊😉🙃 

 जब भी सुलझाना चाहा ज़िंदगी के सवालों को मैंने, 

 हर एक सवाल में जिंदगी मेरी उलझती चली गई। 

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😀😃🎊😉🙃 

 कुछ ऐसे हादसे भी होते हैं ज़िंदगी में ऐ दोस्त, 

 इंसान बच तो जाता है मगर ज़िंदा नहीं रहता। 

 😀😃🎊😉🙃


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 मंजिलें मुझे छोड़ गयी रास्तों ने संभाल लिया, 

 जिंदगी तेरी जरूरत नहीं मुझे हादसों ने पाल लिया। 

 😀😃🎊😉🙃


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 मुझे ज़िंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं है दोस्तों, 

 पर लोग कहते हैं यहाँ सादगी से कटती नहीं। 

 😀😃🎊😉🙃


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 हासिल-ए-ज़िंदगी हसरतों के सिवा और कुछ भी नहीं, 

 ये किया नहीं, वो हुआ नहीं, ये मिला नहीं, वो रहा नहीं। 

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 नजरिया बदल के देख, हर तरफ नजराने मिलेंगे, 

 ऐ ज़िंदगी यहाँ तेरी तकलीफों के भी दीवाने मिलेंगे। 

 😀😃🎊😉🙃


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 कितना और बदलूं खुद को ज़िंदगी जीने के लिए, 

 ऐ ज़िंदगी, मुझको थोड़ा सा मुझमें बाकी रहने दे। 

 😀😃🎊😉🙃


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 अब समझ लेता हूँ मीठे लफ़्ज़ों की कड़वाहट, 

 हो गया है ज़िंदगी का तजुर्बा थोड़ा थोड़ा। 

 😀😃🎊😉🙃


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 हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ऐ ज़िंदगी, 

 हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी। 

 😀😃🎊😉🙃


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 पहचानूं कैसे तुझ को मेरी ज़िंदगी बता, 

 गुजरी है तू करीब से लेकिन नकाब में। 

 😀😃🎊😉🙃


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 अकेले ही गुजर जाती है तन्हा ज़िंदगी, 

 लोग तसल्लियाँ तो देते हैं साथ नहीं देते। 

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 जो तेरी चाह में गुजरी वही ज़िंदगी थी बस, 

 उसके बाद तो बस ज़िंदगी ने गुजारा है मुझे। 

 😀😃🎊😉🙃


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 एक उम्र गुस्ताखियों के लिये भी नसीब हो, 

 ये ज़िंदगी तो बस अदब में ही गुजर गई। 

 😀😃🎊😉🙃


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 ज़िंदगी जिसका बड़ा नाम सुना है हमने, 

 एक कमजोर सी हिचकी के सिवा कुछ भी नहीं। 

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 कुछ इस तरह फ़कीर ने ज़िंदगी की मिसाल दी, 

 मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी। 

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 ये कशमकश है कैसे बसर ज़िंदगी करें, 

 पैरों को काट फेंके या चादर बड़ी करें। 

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 ज़िन्दगी लोग जिसे मरहम-ए-ग़म जानते हैं, 

 जिस तरह हम ने गुज़ारी है वो हम जानते हैं। 

 😀😃🎊😉🙃


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 नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब, 

 ज़िंदगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले। 

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 ले दे के अपने पास फ़क़त एक नजर तो है, 

 क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नजर से हम। 

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 बख्शा है ठोकरों ने सँभलने का हौसला, 

 हर हादसा ख्याल को गहराई दे गया। 

 😀😃🎊😉🙃


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 रोज रोज गिर कर भी मुक़म्मल खड़े हैं, 

 ऐ ज़िंदगी देख मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं। 

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 अपने वजूद पर इतना न इतरा, ऐ ज़िन्दगी. 

 वो तो मौत है जो तुझे मोहलत दिए जा रही है। 

 😀😃🎊😉🙃


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 फुर्सत मिले जब भी तो रंजिशे भुला देना, 

 कौन जाने साँसों की मोहलतें कहाँ तक हैं। 

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 मुझ से नाराज़ है तो छोड़ दे तन्हा मुझको, 

 ऐ ज़िंदगी, मुझे रोज-रोज तमाशा न बनाया कर। 

 😀😃🎊😉🙃


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 हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली, 

 कुछ यादें मेरे संग पाँव पाँव चली, 

 सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ, 

 वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली। 

 😀😃🎊😉🙃


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 ज़िन्दगी वो जो ख्वाबों-ख्यालों में है, 

 वो तो शायद मयस्सर न होगी कभी, 

 ये जो लिक्खी हुई इन लकीरों में है, 

 अब इसी ज़िन्दगानी के हो जाएँ क्या। 

 😀😃🎊😉🙃


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 हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का, 

 एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का, 

 बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते, 

 यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का। 

 😀😃🎊😉🙃


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 अब तो अपनी तबियत भी जुदा लगती है, 

 सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा लगती है, 

 कभी राजी तो कभी मुझसे खफा लगती है, 

 जिंदगी तू ही बता तू मेरी क्या लगती है। 

 😀😃🎊😉🙃


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 तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम, 

 ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम, 

 लो आज हमने छोड़ दिया रिश्ता ए उमीद, 

 लो अब कभी किसी से गिला ना करेगे हम, 

 पर जिंदगी मे मिल गये इत्तेफ़ाक से 

 पुछेगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम। 

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 जहाँ जहाँ कोई ठोकर है मेरी किस्मत में, 

 वहीं वहीं लिए फिरती है मेरी ज़िन्दगी मुझको। 

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 रोज़ दिल में हसरतों को जलता देख कर, 

 थक चुका हूँ ज़िंदगी का ये रवैया देख कर। 

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 मुझ से नाराज़ है तो छोड़ दे तन्हा मुझको, 

 ऐ ज़िन्दगी मुझे रोज़ रोज़ तमाशा न बनाया कर। 

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 जो लम्हा साथ है उसे जी भर के जी लेना, 

 ये कम्बख्त जिंदगी भरोसे के काबिल नहीं है। 

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 शतरंज‬ खेल रही है मेरी ‪जिंदगी‬ कुछ इस तरह, 

 कभी तेरी मोहब्बत मात देती है कभी मेरी ‪किस्मत‬। 

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 कल न हम होंगे न कोई गिला होगा, 

 सिर्फ सिमटी हुयी यादों का सिलसिला होगा, 

 जो लम्हे हैं चलो हँसकर बिता दें, 

 जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा। 

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😀😃🎊😉🙃 

 खुशी में भी आँखें आँसू बहाती रही, 

 जरा सी बात देर तक रुलाती रही, 

 कोई खो के मिल गया तो कोई मिल के खो गया, 

 ज़िंदगी हम को बस ऐसे ही आज़माती रही। 

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😀😃🎊😉🙃 

 ज़िन्दगी से पूछिये ये क्या चाहती है, 

 बस एक आपकी वफ़ा चाहती है, 

 कितनी मासूम और नादान है ये, 

 खुद बेवफा है और वफ़ा चाहती है। 

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 ज़िंदगी तू कोई दरिया है कि सागर है कोई, 

 मुझको मालूम तो हो कौन से पानी में हूँ मैं। 

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 वो ज़िंदगी जिसे समझा था कहकहा सबने, 

 हमारे पास खड़ी थी तो रो रही थी अभी। 

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 सबक वो हमको पढ़ाए हैं ज़िंदगी ने कि हम, 

 हुआ था जो इल्म किताबों से वो भी भूल गए। 

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 देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना करीब से, 

 चेहरे तमाम लगने लगे हैं अब तो अजीब से। 

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 छोड़ ये बात कि मिले ज़ख़्म कहाँ से मुझको, 

 ज़िंदगी इतना बता कितना सफर बाकी है। 

 😀😃🎊😉🙃


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 दौड़ती भागती जिंदगी का 

 यही तोहफ़ा है, 

 खूब लुटाते रहे अपनापन 

 फिर भी लोग खफा हैं। 

 😀😃🎊😉🙃


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 सच बिकता है झूठ बिकता है 

 बिकती है हर कहानी, 

 तीनों लोक में फैला है फिर भी 

 बिकता है बोतल में पानी। 

 😀😃🎊😉🙃


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